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महाराष्ट्र के पुणे में नाबालिग बालिका से भाई और पिता पांच साल से कर रहे थे बलात्कार, गलत तरीके से छूते थे दादा

तारीख:  19 मार्च, 2022

स्रोत (Source): एनडीटीवी इंडिया

तस्वीर स्रोत : एनडीटीवी इंडिया

स्थान : महाराष्ट्र

मेघालय हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने फैसला सुनाया है कि अगर बलात्कार पीड़िता को उसके जननांग एरिया में दर्द नहीं हुआ और उसने बलात्कार के समय अंडरवियर पहना था, तो यह साबित करने के लिए अपर्याप्त सबूत है कि कोई प्रवेश नहीं हुआ था. उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि योनि या मूत्रमार्ग में किसी भी वस्तु को किसी भी हद तक सम्मिलित करना भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 375 (बी) के उद्देश्य से बलात्कार के समान होगा.

मेघालय हाई कोर्ट ने 2006 के एक मामले में एक नाबालिग बालिका से बलात्कार के मामले में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की. याचिका पर मुख्य जस्टिस संजीव बनर्जी और जस्टिस डब्ल्यू डिएंगदोह की पीठ द्वारा सुनवाई की जा रही थी.

अपराध सितंबर 2006 में हुआ था, और उसी महीने पीड़िता द्वारा एक रिपोर्ट दर्ज की गई थी, उसके बाद अक्टूबर 2006 में नाबालिग की मेडिकल जांच की गई थी. मेडिकल परीक्षक ने निष्कर्ष निकाला कि बालिका के साथ बलात्कार किया गया था और वह मानसिक पीड़ा से पीड़ित थी क्योंकि उसकी योनि कोमल थी और परीक्षण के दौरान उसका हाइमन टूट गया था. नाबालिग ने कहा था कि उसे कोई दर्द नहीं हुआ और आरोपी ने पेनिट्रेशन नहीं कराया, बल्कि अंडरवियर के ऊपर से रगड़ा. बाद में निचली अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया. अभियुक्त ने दोषसिद्धि के फैसले के जवाब में याचिका दायर की थी, जिसमें दावा किया गया कि प्रवेश का पता नहीं चला और इसलिए बलात्कार के लिए आईपीसी की धारा 376 लागू नहीं होनी चाहिए.

एनडीटीवी इंडिया की इस खबर को पढ़ने के लिए यहां पर क्लिक करें.

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